नई दिल्ली : विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने शुक्रवार, 31 जुलाई को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की ओर से पेश किए गए विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया। सदन में चर्चा नहीं हो सकी। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

जन्म-मृत्यु के देरी से पंजीकरण पर सख्ती

विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना है। प्रस्तावित बदलाव के तहत जन्म या मृत्यु की घटना के एक साल बाद, लेकिन दो साल के भीतर पंजीकरण के लिए संबंधित अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होगी। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या जिला मजिस्ट्रेट की ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा।

समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश

सरकार का कहना है कि संशोधनों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करना और विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाना है। नए प्रावधानों के जरिए लंबे समय से लंबित रजिस्ट्रेशन मामलों में सत्यापन और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

हंगामे पर किरेन रिजिजू ने विपक्ष को घेरा

विधेयक के पारित होने के दौरान सदन में हुए हंगामे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सांसदों को महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श में हिस्सा लेना चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील करते हुए कहा कि जनता ने सांसदों को कानूनों पर चर्चा और उनका निर्माण करने के लिए संसद भेजा है।

शोर-शराबे के बीच पारित हुआ बिल

शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही। इसी बीच नित्यानंद राय ने विधेयक पर सदन की सहमति मांगी और ध्वनि मत से इसे पारित कर दिया गया। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने भी विपक्षी सदस्यों से सदन चलाने में सहयोग करने की अपील की।

सोमवार तक स्थगित हुई लोकसभा की कार्यवाही

लगातार हंगामा जारी रहने के बाद पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी। इस तरह जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव से जुड़ा विधेयक लोकसभा से पारित हो गया, जबकि सदन में इस पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।

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