independence-day-2026: लाल किले पर इस बार बदलेगा आजादी का जश्न, पहले गूंजेगा वंदे मातरम्, फिर फहरेगा तिरंगा

independence-day-2026: नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार लाल किले की प्राचीर से आजादी के जश्न का एक नया दृश्य देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने के बाद सबसे पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की धुन गूंजेगी।

Update: 2026-08-10 13:26 GMT

independence-day-2026: नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार लाल किले की प्राचीर से आजादी के जश्न का एक नया दृश्य देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने के बाद सबसे पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की धुन गूंजेगी। इसके बाद प्रधानमंत्री तिरंगा फहराएंगे और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन होगा। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में पहली बार इस नए क्रम को अपनाया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को समारोह के प्रोटोकॉल की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निर्धारित कार्यक्रम के तहत लाल किले की प्राचीर पर पहुंचेंगे। उनके पहुंचने के बाद राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान समारोह में मौजूद सभी लोग सम्मान में खड़े होंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्रगान का गायन होगा।

पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में नया क्रम

अब तक लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान और फिर प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन प्रमुख क्रम रहा है। इस बार इसमें बदलाव करते हुए ‘वंदे मातरम्’ को ध्वजारोहण से पहले स्थान दिया गया है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में इस तरह राष्ट्रगीत को पहले प्रस्तुत किए जाने का यह पहला अवसर है। बदलाव के पीछे केंद्र सरकार की ओर से इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ को दिए जा रहे विशेष महत्व को भी अहम माना जा रहा है।

देशभर में हो रहे कार्यक्रम

केंद्र सरकार ने इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय के प्रोटोकॉल के मुताबिक, जब किसी आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो राष्ट्रगीत को पहले प्रस्तुत किया जाना है।

दरअसल, 2026 में ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर देशभर में इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह का विषय भी ‘वंदे मातरम्’ पर केंद्रित रहा था।

हालांकि, ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सरकार के फैसलों पर राजनीतिक बहस भी जारी रही है। केंद्र सरकार इसे स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना से जोड़कर देखती है। वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं ने गीत से जुड़े विभिन्न पहलुओं और नए प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल, 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर पर होने वाला यह बदलाव समारोह में आने वाले लोगों के लिए एक नया अनुभव होगा, जहां तिरंगा फहराने से पहले ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई देगी।

Tags:    

Similar News