FSSAI का बड़ा फैसला: एनालॉग पनीर के नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द पर रोक
इनकी संरचना और पोषण असली पनीर से अलग हो सकता है।
नई दिल्ली। नकली और मिलावटी पनीर को लेकर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। अब डेयरी उत्पाद जैसा दिखने वाले एनालॉग पनीर को ‘पनीर’ के नाम से बेचने पर रोक रहेगी। नए नियमों का मकसद उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति और गुणवत्ता को लेकर भ्रम से बचाना है।
नाम, लेबल और मार्केटिंग पर पाबंदी
FSSAI के संशोधन के मुताबिक, ‘डेयरी संदर्भ में एनालॉग’ श्रेणी के पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत उत्पाद अब अपने नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। संबंधित कारोबारियों को नए नियमों के अनुसार उत्पाद की पहचान और पैकेजिंग में बदलाव करना होगा।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर ऐसे उत्पाद होते हैं, जो देखने और इस्तेमाल में असली पनीर जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें दूध से मिलने वाले ठोस पदार्थों की जगह या उनके साथ वनस्पति तेल और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनकी संरचना और पोषण असली पनीर से अलग हो सकता है।
22 सितंबर को जारी हुई अधिसूचना
प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। अधिसूचना 22 सितंबर को जारी हुई और 23 सितंबर को भारत के राजपत्र में प्रकाशित की गई। एफएसएसएआई की अधिसूचना सूची में इसे 24 सितंबर को दर्ज किया गया।
नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।