रॉकेट से सैटेलाइट तक... PM मोदी ने 20 स्पेस स्टार्टअप्स के CEO से की मुलाकात, भारत के ग्लोबल स्पेस लीडर बनने पर फोकस
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सेवा तीर्थ में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े 20 स्टार्टअप्स के सीईओ और संस्थापकों से मुलाकात की। बैठक में भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र, नई तकनीक, नवाचार और देश को वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
20 स्पेस स्टार्टअप्स के प्रमुख रहे मौजूद
बैठक में स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सआई, पियरसाइट, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, दिगंतारा और सैटश्योर समेत 20 स्टार्टअप्स के प्रमुख शामिल हुए। इन कंपनियों का काम रॉकेट, सैटेलाइट, पृथ्वी अवलोकन, स्पेस डेटा और अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता जैसी तकनीकों से जुड़ा है।
निजी कंपनियों की बढ़ रही भूमिका
भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं है। निजी कंपनियां रॉकेट निर्माण, सैटेलाइट तकनीक और अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई तकनीक विकसित कर रही हैं। स्टार्टअप्स की बढ़ती गतिविधियों से देश के स्पेस सेक्टर में निजी भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
ग्लोबल स्पेस लीडरशिप पर जोर
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है और देश का स्पेस सेक्टर वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
युवाओं की तकनीकी क्षमता की सराहना
प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं और नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों व इंजीनियरों की क्षमता की भी सराहना की। उन्होंने कहा था कि आज भारत के युवा प्रोपल्शन सिस्टम, कंपोजिट मटेरियल, रॉकेट स्टेज और सैटेलाइट प्लेटफॉर्म जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में हो रहा नवाचार भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई दिशा दे रहा है।
चंद्रयान-3 से बढ़ा आत्मविश्वास
चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 2023 में मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इसके बाद मिशन से मिले वैज्ञानिक आंकड़े दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध कराए गए।
अलग-अलग तकनीकों पर काम कर रहे स्टार्टअप्स
बैठक में शामिल 20 स्टार्टअप्स अंतरिक्ष क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे हैं। इनमें स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सआई, पियरसाइट, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, दिगंतारा, सैटश्योर, सुहोरा टेक्नोलॉजीज, मनास्तु स्पेस, एस्ट्रोबेस, टेकमी2स्पेस, व्योमआईसी, कॉस्मोसर्व स्पेस, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, स्काईसर्व, सेरेन्डिपिटी स्पेस, वासर लैब्स और मिस्टियो शामिल हैं। प्रधानमंत्री का इन कंपनियों से संवाद भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।