नई दिल्ली। भारत में एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में E100 ईंधन के इस्तेमाल को मंजूरी देने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है। 23 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना 26 अक्टूबर को राजपत्र में प्रकाशित हुई। इस बदलाव से वाहन कंपनियों के लिए अधिक एथेनॉल वाले ईंधन पर चलने वाली गाड़ियों के परीक्षण और प्रमाणन का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि E100 अब हर पेट्रोल कार में इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या है E100 फ्यूल और E20 से कितना अलग?

E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग पूरी मात्रा एथेनॉल की होती है। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है। इसके विपरीत, भारत में इस्तेमाल होने वाले E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। E10 में 10 प्रतिशत, जबकि E85 में लगभग 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है। इन ईंधनों के बीच सबसे बड़ा अंतर एथेनॉल की मात्रा और उन्हें इस्तेमाल करने के लिए जरूरी वाहन तकनीक का है।

क्या सामान्य पेट्रोल कार में E100 डलवा सकते हैं?

नहीं, सामान्य पेट्रोल कारों में सीधे E100 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह ईंधन केवल उन वाहनों के लिए है, जिन्हें निर्माता ने खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप तैयार और प्रमाणित किया हो। ऐसे वाहनों में फ्यूल सिस्टम, इंजन के पुर्जे और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल तकनीक अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के हिसाब से डिजाइन की जाती है। सामान्य पेट्रोल कार में E100 डालने से फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए वाहन निर्माता की अनुमति और निर्देशों के बिना इस ईंधन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

कार कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?

नियमों में संशोधन से वाहन निर्माता कंपनियों को E100 और E85 पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए स्पष्ट नियामकीय आधार मिला है। इससे भविष्य में इस तकनीक पर आधारित गाड़ियों के विकास को मदद मिल सकती है। सरकार ने उत्सर्जन मानकों और परीक्षण से जुड़े प्रावधानों में E100 को E85 के साथ शामिल किया है। हालांकि, यह बदलाव अपने आप में देशभर में E100 की बिक्री शुरू होने या नई कारों की लॉन्च तारीख की घोषणा नहीं है।

E100 फ्यूल के क्या फायदे हो सकते हैं?

E100 और अन्य एथेनॉल आधारित ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ने से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। यदि एथेनॉल घरेलू कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, तो इससे किसानों और जैव ईंधन उत्पादन से जुड़े क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है। उपयुक्त वाहनों में एथेनॉल का इस्तेमाल प्रदूषक उत्सर्जन और ईंधन के उत्पादन से लेकर इस्तेमाल तक होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर एथेनॉल के स्रोत, उत्पादन प्रक्रिया और वाहन की तकनीक पर निर्भर करेगा।

क्या E100 से कार चलाना सस्ता पड़ेगा?

फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि E100 से कार चलाने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले कम होगा या नहीं। एथेनॉल में प्रति लीटर पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है, इसलिए समान दूरी तय करने के लिए वाहन को अधिक ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। वास्तविक खर्च E100 की कीमत, वाहन की माइलेज, इंजन की दक्षता और ईंधन की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। केवल एथेनॉल की मात्रा अधिक होने से यह तय नहीं होता कि कार चलाना सस्ता पड़ेगा।

क्या भारत में E100 फ्यूल की बिक्री शुरू हो गई है?

E100 को नियमों में मान्यता मिलने का अर्थ यह नहीं है कि यह ईंधन हर पेट्रोल पंप पर उपलब्ध है। सरकार का यह कदम मुख्य रूप से E100 और E85 पर चलने वाले वाहनों के नियामकीय प्रावधानों से जुड़ा है। देशभर में इसकी व्यावसायिक उपलब्धता और पेट्रोल पंपों पर बिक्री को लेकर अलग जानकारी की जरूरत होगी। इसलिए वाहन चालकों को अपनी गाड़ी के निर्माता के निर्देशों का पालन करना चाहिए और सामान्य पेट्रोल कार में E100 का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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