नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तय कर दिया है। सरकार के इस फैसले से मरीजों को महंगी दवाओं से राहत मिलने की उम्मीद है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, नए प्रावधान से कुछ दवाओं की खुदरा कीमतों में मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

137 कैंसर दवाओं पर लागू होगा नया नियम

दवा मूल्य नियामक NPPA ने ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (TMR) व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत 137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना और मरीजों को कम खर्च में जरूरी इलाज उपलब्ध कराने में मदद करना है।

क्या होता है ट्रेड मार्जिन?

ट्रेड मार्जिन वह अंतर होता है, जो दवा की खरीद कीमत और बिक्री कीमत के बीच व्यापारिक स्तर पर जुड़ता है। इसमें वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन की भूमिका होती है। सरकार द्वारा इसकी सीमा तय करने से दवा की अंतिम कीमत में कमी आने की संभावना बढ़ती है। हालांकि, वास्तविक बचत संबंधित दवा की मौजूदा कीमत, मूल्य संरचना और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।

मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत

कैंसर का इलाज लंबे समय तक चल सकता है और कई दवाओं की कीमत काफी अधिक होती है। ऐसे में दवाओं के व्यापारिक मार्जिन पर सीमा लगाने से मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सकता है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, इस कदम से कुछ दवाओं की खुदरा कीमतों में 70 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। यह संभावित अधिकतम कमी है, सभी 137 दवाओं की कीमतों में इतनी ही गिरावट होना जरूरी नहीं है।

9 नवंबर से लागू होने की जानकारी

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह व्यवस्था 9 नवंबर से लागू होने वाली है। NPPA ने गजट अधिसूचना के माध्यम से नए प्रावधान की जानकारी दी है। इसका मकसद कैंसर की दवाओं की बिक्री में व्यापारिक मार्जिन को तर्कसंगत बनाना और जरूरी दवाओं को मरीजों के लिए अधिक किफायती बनाना है।


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