इंदौर। मध्यप्रदेश में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार नई टाउनशिप, इकोनॉमिक कॉरिडोर और आधुनिक आवासीय बस्तियों के विकास पर जोर दे रही है। इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की शहरी विकास योजनाओं और भविष्य की रूपरेखा पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शहरीकरण के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। सरकार का लक्ष्य सुनियोजित विकास के साथ लोगों को बेहतर सुविधाएं, किफायती आवास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

इकोनॉमिक कॉरिडोर के आसपास विकसित होंगी नई टाउनशिप

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित आवासीय बस्तियां विकसित की जाएंगी। इन टाउनशिप में रिन्यूएबल एनर्जी, स्वच्छ पेयजल और बेहतर आवागमन जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इकोनॉमिक कॉरिडोर को ध्यान में रखकर नई टाउनशिप विकसित करने की योजना है, ताकि आवासीय विकास के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सके। सरकार अवैध कॉलोनियों के बजाय नियोजित और नियमित आवासीय क्षेत्रों को प्रोत्साहित करना चाहती है, जहां लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ रोजगार के अवसर भी मिलें।

इंदौर-भोपाल के बाद जबलपुर और ग्वालियर पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर और भोपाल के बाद जबलपुर और ग्वालियर को भी महानगरीय विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इंदौर और भोपाल सहित छह-छह जिलों को जोड़कर महानगरीय क्षेत्र विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचे, आवागमन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के जरिए विकास को गति देने की योजना है। सरकार का उद्देश्य प्रमुख शहरों के साथ आसपास के क्षेत्रों को भी विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है।

100 मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति पर बड़ा बयान

भवन निर्माण के नियमों में बदलाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्याप्त चौड़ी सड़क उपलब्ध होने की स्थिति में 100 मंजिल तक की इमारतों के निर्माण की अनुमति देने की दिशा में निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, ऊंची इमारतों के निर्माण से कृषि भूमि पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक क्रियान्वयन संबंधित नियमों और निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेगा।

स्वामित्व योजना के तहत 50 लाख रजिस्ट्रियों का लक्ष्य

स्वामित्व योजना पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में लोगों को संपत्ति का स्वामित्व अधिकार दिलाने की पहल की थी। मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों और ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 50 लाख रजिस्ट्रियां करने का है, जिससे लोगों को उनके संपत्ति संबंधी अधिकार मिल सकें और संपत्ति का कानूनी रिकॉर्ड मजबूत हो।

संपत्ति के आधार पर बैंक से मिल सकेगी आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि 50 लाख परिवारों को अपनी संपत्ति के आधार पर बैंकिंग सुविधाओं और निवेश के अवसरों तक पहुंच मिलती है, तो इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। संपत्ति के वैध दस्तावेज होने से पात्र परिवारों के लिए बैंक से ऋण लेने और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी के अवसर बढ़ सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

बारिश की स्थिति पर भी मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में बारिश की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में वर्षा का स्तर अलग रहा है। कुछ क्षेत्रों में कम बारिश हुई है, जबकि कई इलाकों में अतिवृष्टि की स्थिति बनी है। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए जरूरतमंद क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने के लिए कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित इलाकों में परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं।

सुनियोजित विकास और रोजगार बढ़ाने पर सरकार का जोर

अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित विकास पर जोर दिया। नई टाउनशिप, महानगरीय क्षेत्रों के विस्तार, आधुनिक आवासीय सुविधाओं और स्वामित्व अधिकारों से जुड़ी योजनाओं के जरिए सरकार विकास की गति बढ़ाना चाहती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन पहलों का उद्देश्य लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाना और प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

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