जबलपुर। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में OBC वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण ही लागू रहेगा। अदालत ने लंबे समय से होल्ड रखे गए 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश भी दिए हैं।

50% आरक्षण सीमा पार करने के पर्याप्त आधार नहीं

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान आरक्षण की संवैधानिक सीमा और राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों पर विचार किया। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के मुताबिक, अदालत ने दस्तावेजों और उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा के बाद फैसला सुनाया। उनका कहना है कि मामला OBC वर्ग को आरक्षण देने का नहीं, बल्कि मौजूदा आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का था।

अदालत के सामने यह सवाल भी था कि क्या आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थितियां साबित होती हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत को इसके लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में दिए गए फैसले का भी संदर्भ आया।

13% होल्ड पदों पर तीन महीने में नियुक्ति

हाई कोर्ट ने 13 प्रतिशत होल्ड पदों को अनारक्षित वर्ग की चयन सूची के आधार पर भरने का निर्देश दिया है। इन पदों पर लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अब प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। आदेश के अनुसार, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन से जुड़ी भर्ती एजेंसियों और अन्य संबंधित संस्थानों को तीन महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस निर्देश का असर उन सरकारी भर्तियों पर पड़ सकता है, जिनमें OBC आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने के विवाद के कारण पदों का एक हिस्सा रोका गया था। अब संबंधित भर्ती एजेंसियों को अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।

2019 में कमलनाथ सरकार ने बढ़ाया था आरक्षण

मध्य प्रदेश में वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने OBC वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके बाद इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। मामला आगे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई और निर्णय के लिए उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भेजने के निर्देश दिए गए।

आरक्षण बढ़ाने के पक्ष और विरोध में कई याचिकाएं दाखिल हुई थीं। इन याचिकाओं में आरक्षण की सीमा, OBC वर्ग के प्रतिनिधित्व और सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े आंकड़ों सहित विभिन्न संवैधानिक पहलुओं को उठाया गया था।

5 अगस्त को पूरी हुई थी अंतिम सुनवाई

इस मामले में हाई कोर्ट की विशेष खंडपीठ ने 5 अगस्त 2026 को अंतिम सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 9 अक्टूबर को फैसला सुनाए जाने के बाद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर अदालत का रुख स्पष्ट हो गया है।

सरकारी भर्ती और नियुक्तियों पर पड़ेगा असर

हाई कोर्ट के फैसले से मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण के प्रतिशत और लंबित नियुक्तियों से जुड़ी स्थिति में बदलाव आएगा। 14 प्रतिशत आरक्षण लागू रहने और 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश के बाद भर्ती एजेंसियों को चयन और नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। अब संबंधित विभागों और भर्ती संस्थानों की कार्रवाई पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।

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