चित्रकूट। मध्य प्रदेश के चित्रकूट और सतना जिले में लगातार हुई भारी बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। पिछले कई घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और मानिकपुर क्षेत्र के डोडा डैम के ओवरफ्लो होकर क्षतिग्रस्त होने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। बाढ़ का पानी शहर और आसपास के निचले इलाकों में घुस गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग घरों की छतों पर फंस गए। हालात बिगड़ने के बाद सेना के हेलिकॉप्टरों के साथ NDRF और SDRF की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुट गईं।

रामघाट और भरतघाट समेत कई इलाकों में जलभराव

मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के बाद रामघाट, भरतघाट और अन्य निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल गया। कई घरों और दुकानों में पहली मंजिल तक पानी पहुंच गया। इससे लोगों को अपना सामान छोड़कर ऊपरी मंजिलों और छतों पर शरण लेनी पड़ी। बाढ़ के बीच कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर मदद का इंतजार करते नजर आए। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया।

सेना के हेलिकॉप्टरों से किया गया एयर रेस्क्यू

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए सेना के दो हेलिकॉप्टर राहत अभियान में लगाए गए। प्रशासन और बचाव दलों ने जलमग्न घरों और इमारतों में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए हेलिकॉप्टर और नावों की मदद ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, अभियान के दौरान करीब 750 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रभावित लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में पहुंचाया गया, जहां भोजन, पानी और सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

डोडा डैम टूटने से रेल ट्रैक पर भी संकट

मानिकपुर क्षेत्र में डोडा डैम के क्षतिग्रस्त होने का असर सतना-मानिकपुर रेलखंड पर भी पड़ा। चितहरा रेलवे स्टेशन के आसपास रेल पटरियां पानी में डूब गईं और कई जगह जलस्तर करीब तीन फीट तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। बाढ़ की स्थिति में रेलकर्मियों ने भी मोर्चा संभाले रखा। सामने आए वीडियो में एक कर्मचारी लाल झंडी लेकर पानी से भरे ट्रैक पर आगे चलता दिखाई देता है, जबकि उसके पीछे ट्रेन बेहद धीमी गति से आगे बढ़ती नजर आती है। रेलकर्मियों की सतर्कता और जोखिम उठाकर किए गए काम की सराहना हो रही है।

कई प्रमुख सड़क मार्गों पर आवाजाही बंद

बाढ़ और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन रोक दिया है। सतना-अटरा, सभापुर-नयागांव, पिंडरा-नकैला-बरौंदा और मझगवां-पटना-पहाड़ी समेत कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है। इसके अलावा आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया आश्रम और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर भी भारी जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है।

ग्राउंड जीरो पर पहुंचे CM मोहन यादव

बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर लोगों से मुलाकात की और अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी कम होने के बाद प्रभावित इलाकों में घर-घर सर्वे कराया जाए, ताकि मकानों, पशुओं और अन्य नुकसान का आकलन कर नियमानुसार राहत एवं मुआवजा दिया जा सके। उन्होंने प्रशासन को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने को कहा।

जलस्तर में गिरावट से मिली राहत

जिला प्रशासन के अनुसार मंदाकिनी का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब धीरे-धीरे नीचे आने लगा है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि यदि आगे भारी बारिश नहीं होती है तो स्थिति नियंत्रण में आने की उम्मीद है। बाढ़ का पानी कम होने के साथ राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में अब कीचड़, खराब हुआ सामान, क्षतिग्रस्त सड़कें और बंद बाजार बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

राहत के बाद पुनर्वास और नुकसान का आकलन चुनौती

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और लापता या फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना है। इसके बाद बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। चित्रकूट में आई इस भीषण बाढ़ ने एक बार फिर नदी किनारे बसे इलाकों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। अब लोगों की नजर पानी के पूरी तरह उतरने और सामान्य जनजीवन की बहाली पर है।

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