ट्रंप के विरोध के बावजूद पहले मुस्लिम सीनेटर बने अब्दुल अल-सैयद, मिशिगन में माइक रोजर्स को हराया; भारत से क्या है खास रिश्ता
| स्वास्थ्य सेवाओं को बनाया चुनावी मुद्दा
नई दिल्ली: अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ वे अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। खास बात यह है कि अल-सैयद का भारत से भी पारिवारिक रिश्ता है। उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू का परिवार कर्नाटक के भटकल से ताल्लुक रखता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को बनाया चुनावी मुद्दा
अब्दुल अल-सैयद ने चुनाव प्रचार में सभी नागरिकों को मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने तथा सरकारी जवाबदेही का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़ी कंपनियों और अमीर लोगों के बजाय आम नागरिकों के हित में काम करना चाहिए।
डॉक्टर से राजनीति तक का सफर
अल-सैयद ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। वे वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग में निदेशक भी रह चुके हैं। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
भारत से क्या है अब्दुल अल-सैयद का रिश्ता?
अब्दुल अल-सैयद का भारत से रिश्ता उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के जरिए है। सारा का परिवार कर्नाटक के तटीय शहर भटकल से ताल्लुक रखता है, जो मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर दूर है। उनके दादा जुकाकू शमसुद्दीन मैसूर राज्य में वित्त उप-मंत्री रह चुके हैं। अल-सैयद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी शादी को करीब 20 साल हो चुके हैं और वे भारतीय परिवार व संस्कृति से काफी जुड़ चुके हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि वे खुद को अरब से ज्यादा भारतीय महसूस करते हैं।
ट्रंप ने किया था विरोध
चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सैयद का विरोध करते हुए उन्हें जिहादी कहा था। इसके बावजूद उन्होंने मिशिगन में जीत दर्ज की। यह मुकाबला