Dhanteras 2026: धनतेरस का शिव, धन्वंतरि और मां लक्ष्मी से क्या है संबंध? जानिए पौराणिक महत्व
Dhanteras Mythological Importance: धनतेरस का पर्व सिर्फ खरीदारी का नहीं है! जानिए इस दिन भगवान शिव, धन्वंतरि और मां लक्ष्मी के प्रकट होने की पौराणिक कथा और महत्व।
इंटरनेट डेस्क। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और नई चीजें खरीदने की परंपरा तो पुरानी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पर्व का गहरा संबंध केवल खरीदारी से नहीं, बल्कि भगवान शिव, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी से जुड़ा है?
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन की कथा से जुड़े इन तीनों ही देवी-देवताओं का धनतेरस से सीधा संबंध है। आइए जानते हैं इस पर्व का वास्तविक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व।
समुद्र मंथन और धनतेरस की पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान ही धनतेरस की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी। इसी ऐतिहासिक मंथन से हलाहल विष, आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि और धन की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि धनतेरस को केवल धन का नहीं, बल्कि आरोग्य और त्याग का पर्व भी माना जाता है।
भगवान शिव और हलाहल विष (त्याग का प्रतीक)
समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले अत्यंत घातक हलाहल विष निकला था, जिसकी गर्मी से पूरी सृष्टि त्राहिमाम करने लगी। तब संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। शिव का यह स्वरूप हमें त्याग, परोपकार और दूसरों के कल्याण की प्रेरणा देता है।
भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश (आरोग्य का प्रतीक)
मंथन के अंतिम चरण में भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद का जनक माना जाता है। चूंकि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही उनका प्राकट्य हुआ था, इसीलिए इस तिथि को ‘धनतेरस’ या ‘धनत्रयोदशी’ कहा जाता है। इस दिन आरोग्य की प्राप्ति के लिए उनकी विशेष पूजा की जाती है।
माता लक्ष्मी का प्राकट्य (सुख-समृद्धि का प्रतीक)
समुद्र मंथन से ही धन, वैभव और सौभाग्य की देवी माता लक्ष्मी का भी अवतार हुआ था। धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी के साथ-साथ धन के देवता भगवान कुबेर की भी उपासना की जाती है, ताकि घर में कभी अन्न-धन की कमी न हो।
जीवन को मिलते हैं तीन बड़े संदेश
धनतेरस का यह पर्व हमें जीवन के तीन अमूल्य संदेश देता है, भगवान शिव का विषपान त्याग सिखाता है, भगवान धन्वंतरि का अमृत कलश अच्छे स्वास्थ्य (निरोगी काया) का महत्व बताता है, और माता लक्ष्मी का प्राकट्य सुख-समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए धनतेरस केवल भौतिक सुखों का नहीं, बल्कि समग्र खुशहाली का त्योहार है।