Ahoi Ashtami 2026 : धर्म डेस्क। संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी व्रत इस साल 1 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन माताएं अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं और संतान के कल्याण के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय पूजा, व्रत कथा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है।

अहोई अष्टमी की पूजा में कुछ विशेष सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में व्रत के दिन किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूजा से पहले ही सभी जरूरी सामान जुटा लेना बेहतर रहता है।

अहोई अष्टमी पूजा के लिए जरूरी सामग्री

अहोई माता की पूजा के लिए इन सामग्रियों को पहले से तैयार रखें:

अहोई माता का चित्र या गेरू

पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा

रोली, कुमकुम और हल्दी

साबुत चावल यानी अक्षत

फूल और फूलों की माला

दीपक, घी और रुई की बत्ती

धूप और अगरबत्ती

पूजा की थाली

जल से भरा कलश

करवा और उसका ढक्कन

दूध और चावल

फल और मिठाई

गेहूं और दक्षिणा

अहोई अष्टमी व्रत कथा की पुस्तक

मौली और सुपारी

स्याहू की पूजा के लिए क्या रखें?

अहोई अष्टमी की पूजा में स्याहू यानी सेई और उसके बच्चों की आकृति का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई परिवारों में चांदी की स्याहू और चांदी की माला रखकर पूजा करने की परंपरा है। इसे पूजा की थाली में शामिल किया जाता है। हालांकि, यह परंपरा अलग-अलग परिवारों में अलग तरीके से निभाई जाती है।

अहोई माता को किस चीज का भोग लगाएं?

पूजा के दौरान अहोई माता को हलवा, पूरी, मिठाई और फल का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर आठ पूड़ी और आठ पुए चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है। महिलाएं अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पकवान तैयार करती हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है।

शाम को पूजा के बाद कैसे खोलें व्रत?

अहोई अष्टमी के दिन शाम के समय अहोई माता की पूजा की जाती है। इस दौरान व्रत कथा सुनने और आरती करने का विधान है। पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कुछ परिवारों में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है।

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