रायपुर। राजधानी रायपुर के राजकुमार कॉलेज के सामने करबला तालाब के पास आयोजित संघर्ष क्लब दुर्गा उत्सव में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। पिछले 55 सालों से लगातार मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना की जा रही है।

यहां का आकर्षक दुर्गा पंडाल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रायपुरवासियों की स्मृतियों और भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक महापर्व रहा है। हर साल नवरात्रि आते ही शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लाखों श्रद्धालुओं की नजरें इस बात पर टिकी रहती हैं कि इस बार संघर्ष क्लब कौन सा अनोखा रूप पेश करने जा रहा है।



धामों और मंदिरों की जीवंत प्रतिकृतियां

संघर्ष क्लब की सबसे बड़ी पहचान यह रही है कि यह समिति हर साल देश के प्रसिद्ध मंदिरों और कलात्मक कलाकृतियों की तर्ज पर भव्य पंडालों का निर्माण कराती है। इस साल यहां मां दुर्गा शिव-शक्ति के स्वरूप में विराजमान हैं।

बीते सालों में समिति द्वारा केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ, वैष्णो देवी की गुफा और दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम मंदिर के काल्पनिक व वास्तविक स्वरूपों पर आधारित भव्य पंडाल बनाए जा चुके हैं।



सिर्फ पंडाल ही नहीं, बल्कि पंडाल के भीतर और बाहर स्थापित होने वाली लाइट एंड साउंड झांकियां हमेशा से बच्चों और युवाओं के आकर्षण का केंद्र रही हैं। पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और पौराणिक कथाओं पर आधारित झांकियां यहां की मुख्य विशेषता रही हैं।

भव्य महाआरती की परंपरा

पिछले वर्षों के आयोजनों का इतिहास देखें तो यहां अष्टमी और नवमी के दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। तालाब का किनारा होने और मुख्य सड़क (राजकुमार कॉलेज रोड) पर स्थित होने के कारण ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए समिति स्वयं सैकड़ों वॉलिंटियर्स (स्वयंसेवकों) और रायपुर पुलिस के साथ मिलकर चौबीसों घंटे तैनात रहती है।

5 दशकों से अधिक पुरानी ऐतिहासिक परंपरा

राजधानी के इस प्रतिष्ठित आयोजन का इतिहास 50 साल से भी अधिक पुराना है। पिछले पांच दशकों से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा ने शहर के धार्मिक पटल पर अपनी एक खास जगह बनाई है। हर साल यहाँ माता रानी के भव्य स्वरूप और आकर्षक पंडाल के दर्शन करने के लिए रायपुर ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।

सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की अनूठी मिसाल

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सामाजिक महत्ता है। संघर्ष क्लब द्वारा आयोजित यह दुर्गा उत्सव शहर में सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। यहाँ सभी धर्मों और वर्गों के लोग मिलकर इस महापर्व को पूरी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं।

आकर्षक सजावट और दिव्य दर्शन

हर वर्ष की तरह इस बार भी समिति द्वारा भव्य और मनमोहक मूर्ति स्थापना की गई है। आकर्षक विद्युत सज्जा और कलात्मक पंडाल के चलते शाम ढलते ही यहाँ भक्तों का तांता लग जाता है। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच यह ऐतिहासिक आयोजन राजधानी के सबसे लोकप्रिय दुर्गा उत्सवों में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है।

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