बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आज से दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर बिलासपुर पहुंच रहे हैं। उनके इस दौरे को संगठन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ छत्तीसगढ़ में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इस दौरान प्रांत को दो हिस्सों में बांटने और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।

बिलासपुर में बौद्धिक वर्ग को करेंगे संबोधित

डॉ. मोहन भागवत नागपुर से गोंडवाना एक्सप्रेस द्वारा आज शाम करीब 4 बजे बिलासपुर पहुंचेंगे। इसके बाद वे सीधे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचेंगे, जहां वे शाम 7 से 8 बजे तक बौद्धिक वर्ग के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

इस सत्र में संघ के पदाधिकारियों के अलावा भाजपा और अन्य आनुषंगिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल होंगे। सुरक्षा के मद्देनजर सरस्वती शिशु मंदिर परिसर, आसपास के इलाकों और रेलवे स्टेशन पर चौकसी बढ़ा दी गई है। रात्रि विश्राम भी वे यहीं करेंगे।

युवाओं को संगठन से जोड़ने की रणनीति

सूत्रों के मुताबिक, संघ आने वाले समय में 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को बड़े पैमाने पर जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के युवाओं को दिशा-निर्देश देते हुए संघ प्रमुख उन्हें सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने के टिप्स दे सकते हैं।

छत्तीसगढ़ प्रांत को रायपुर और बिलासपुर में बांटने की योजना

दौरे के दूसरे दिन यानी 23 अक्टूबर को प्रांत कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। चर्चा है कि इस बैठक में छत्तीसगढ़ में संघ के 'प्रांत प्रमुख' के मौजूदा पद को समाप्त किया जा सकता है। इसके स्थान पर संगठन को विकेंद्रीकृत करते हुए छत्तीसगढ़ प्रांत को दो अलग-अलग हिस्सों..रायपुर और बिलासपुर विभाग में विभाजित करने पर विचार किया जा रहा है।

वर्तमान में पूरे प्रदेश में 11 विभाग हैं, जिन्हें पुनर्गठन के बाद रायपुर के अंतर्गत 6 और बिलासपुर के अंतर्गत 5 विभागों में बांटा जा सकता है। इस प्रशासनिक और संगठनात्मक बदलाव पर संघ प्रमुख स्थानीय पदाधिकारियों से विस्तार से मंथन करेंगे।

शताब्दी वर्ष के कार्यों की होगी समीक्षा

शुक्रवार को होने वाली बैठकों में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इसमें प्रांत, विभाग और विभिन्न योजना प्रमुख अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। हालांकि, इस आंतरिक बैठक में भाजपा या अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, केवल संघ के चुनिंदा पदाधिकारी ही इसमें शामिल होंगे।

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