रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2026 के अवसर पर नवा रायपुर के शिल्पग्राम मंच पर लोककला, संगीत और नृत्य का एक बेहद मनमोहक संगम देखने को मिला। रविवार को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक माटी की महक और आधुनिक संगीत का अद्भुत मेल नजर आया। पंडवानी की ओजस्वी कथाओं, ढोलमारू की जीवंत प्रस्तुतियों और शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं ने वहां मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पंडवानी और ढोलमारू ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात लोकगाथा पंडवानी की प्रस्तुति सबसे बड़ा आकर्षण रही। दुर्ग के चेतन देवांगन और रायपुर की दुर्गा साहू ने अपनी प्रभावशाली शैली से महाभारत की कथाओं को जीवंत कर दिया।

दुर्ग की रजनी रजक ने ढोलमारू और लोकमंच की प्रस्तुति के जरिए छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की भावनाओं को मंच पर उतारा।बिलासपुर की वंदिता साहू और पायल साहू के लोकसंगीत व लोकमंच ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा बिखेरी।

शास्त्रीय नृत्य और फ्यूजन बैंड का तड़का

पारंपरिक लोककला के साथ-साथ आधुनिक संगीत और शास्त्रीय कला का भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। अनुप्रिया सुल्ताना ने शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति से भारतीय नृत्य परंपरा की सुंदरता को साकार किया।

रायपुर के शिवेन्द्र मण्डावी ने गिटार वादन के साथ लोकसंगीत की बेहतरीन जुगलबंदी पेश की। राजीव श्रीवास्तव के 'रिदम ट्विंस बैंड' और संतोष कुमार सिन्हा के 'फ्यूजन बैंड' ने अपनी आधुनिक संगीत शैली से युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

पारंपरिक लोककला और आधुनिक संगीत के इस अनूठे संगम ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के उल्लास को दोगुना कर दिया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे कलाकारों की इन शानदार प्रस्तुतियों ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का परचम लहरा दिया है।

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