CSMCL Overtime Scam: अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान, 182.98 करोड़ के भुगतान में मिली गड़बड़ी
CSMCL Overtime Scam: ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 182.98 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान मामले में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ विशेष न्यायालय में पूरक चालान पेश किया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में EOW और ACB ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक और बड़ा कदम उठाया है। शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर 182.98 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त भुगतान के मामले में जांच एजेंसी ने सीएसएमसीएल (CSMCL) के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के विरुद्ध विशेष न्यायालय में पूरक चालान पेश कर दिया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे होता था खेल?
जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली पांच मैनपावर एजेंसियों (सुमीत फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशन) को कुल 1,82,98,48,675 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
नियमों में फेरबदल
वर्ष 2019 की निविदा में कर्मचारियों के नियमित वेतन के अतिरिक्त ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान करने का प्रावधान था। एजेंसियों को पहले कर्मचारियों को राशि देनी थी और फिर सीएसएमसीएल से भुगतान लेना था।
जांच में खुलासा हुआ कि कर्मचारियों को यह राशि या तो दी ही नहीं गई या वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दर्शाकर देयक प्रस्तुत किए गए। कर्मचारियों ने अपने बयानों में पुष्टि की कि उन्हें केवल सामान्य वेतन मिला, जबकि उनके नाम पर भारी-भरकम राशि निकाली गई।
अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की भूमिका
9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक सीएसएमसीएल के एमडी रहे त्रिपाठी के कार्यकाल में पांचों एजेंसियों को इन मदों में कुल 1,52,39,77,666 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच में दावा किया गया है कि अनवर ढेबर के कहने पर निविदा शर्तों में बदलाव कराया गया और एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये तक नकद कमीशन वसूल कर ऊपर तक पहुंचाया गया। त्रिपाठी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं।
वहीं ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज जैसी कंपनियों के प्रमुख निर्णय लेने वाले बीआर लोहिया पर आरोप है कि उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट से फर्जी बिल तैयार करवाकर सीएसएमसीएल से भुगतान प्राप्त किया, लेकिन कर्मचारियों को राशि नहीं दी। इन दोनों कंपनियों को कुल 48.08 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान मिला था।
आंगड़िया नेटवर्क और हवाला के जरिए लेनदेन
जांच एजेंसी के पूरक चालान में यह भी सामने आया है कि अवैध रूप से वसूली गई नकद रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए आंगड़िया नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। महमूद अहमद खान और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर यह रकम मुंबई और हैदराबाद तक पहुंचाए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
बता दें इसी मामले में ईडी के प्रतिवेदन के आधार पर पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को पहला चालान पेश किया जा चुका है, और अब इस पूरक चालान से घोटाले की परतें और अधिक खुलकर सामने आ रही हैं।