छत्तीसगढ़ में बिजली संकट गहराया, अक्टूबर में 6800 मेगावाट तक पहुंची खपत; कटौती पर आयोग ने मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ में अक्टूबर के दौरान बिजली की खपत 6800 मेगावाट तक पहुंच गई है। बढ़ती मांग और बिजली कटौती के बीच राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कंपनी से जवाब मांगा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अक्टूबर महीने के दौरान बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी से बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। पिछले साल अक्टूबर में राज्य में अधिकतम बिजली खपत करीब 5300 मेगावाट दर्ज की गई थी, जो इस साल बढ़कर लगभग 6800 मेगावाट तक पहुंच गई। करीब 1500 मेगावाट की इस बढ़ोतरी ने पावर कंपनी के सामने मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। बिजली कटौती की शिकायतों के बीच राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी पावर कंपनी से जवाब मांगा है।
कृषि क्षेत्र, गर्मी और त्योहारों से बढ़ी बिजली की खपत
पावर कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, बिजली की मांग बढ़ने के पीछे कृषि क्षेत्र में खपत का बढ़ना, गर्मी और त्योहारों के दौरान बढ़ा इस्तेमाल प्रमुख कारण हैं। अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर में आमतौर पर इतनी अधिक मांग नहीं रहती, लेकिन इस बार खपत का स्तर पिछले साल के मुकाबले काफी ऊपर चला गया है।
आंकड़ों के अनुसार, सोमवार दोपहर बिजली की मांग करीब 5300 मेगावाट दर्ज की गई थी, जबकि गुरुवार को पीक आवर्स के दौरान यह लगभग 6800 मेगावाट तक पहुंच गई। मांग में इस उतार-चढ़ाव के कारण बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
बिजली उत्पादन जारी, एक इकाई रखरखाव के लिए बंद
राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के बिजली संयंत्र अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन कर रहे हैं। हालांकि, 250 मेगावाट क्षमता वाली डीएसपीएम बिजली संयंत्र की एक इकाई वार्षिक रखरखाव के कारण बंद है। इस कमी को पूरा करने के लिए पावर कंपनी दूसरे राज्यों और पावर एक्सचेंज से बिजली खरीद रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जरूरत के हिसाब से रोजाना लगभग 100 से 700 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है। पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश से 200 मेगावाट बिजली ली गई थी। वहीं, हरियाणा में बारिश के कारण उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का लाभ भी छत्तीसगढ़ को मिला।
पावर एक्सचेंज में महंगी बिजली, फिर भी उपलब्धता की चुनौती
बिजली की बढ़ती मांग के बीच पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदने की लागत भी बढ़ रही है। जानकारी के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर कंपनी को 10 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसके बावजूद बाजार में मांग के अनुरूप बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
पावर कंपनी के अधिकारियों ने देश के अन्य राज्यों में भी बिजली की कमी का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, तमिलनाडु को भी कथित तौर पर 37 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ी। इससे बिजली बाजार में बनी कमी और ऊंची कीमतों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिजली कटौती पर नियामक आयोग ने मांगा जवाब
राज्य में बिजली कटौती को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कंपनी से जवाब तलब किया है। आयोग की पूछताछ ऐसे समय हुई है, जब बिजली की मांग में तेज बढ़ोतरी के बीच आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करनी पड़ रही है। अब कंपनी को मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाते हुए बिजली आपूर्ति सामान्य रखने की चुनौती का सामना करना है।
फसल कटाई और ठंड बढ़ने से राहत की उम्मीद
पावर कंपनी के अधिकारियों को उम्मीद है कि फसल कटाई का काम पूरा होने और तापमान में गिरावट आने के बाद बिजली की मांग कम हो सकती है। फिलहाल कंपनी अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था कर मांग पूरी करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में बिजली की खपत और उपलब्धता की स्थिति पर नजर रहेगी।