रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने बताया कि विभाग में जल्द ही ‘वमिस’ प्रणाली लागू की जाएगी। इसके जरिए डीपीआर तैयार करने से लेकर निर्माण कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं को एकीकृत ऑनलाइन सिस्टम से संचालित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से फाइलों में लगने वाला समय कम होगा और विकास कार्यों को तेजी से जमीन पर उतारा जा सकेगा।

ऑनलाइन व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य के बुनियादी ढांचे का प्रमुख आधार है और सड़क, पुल तथा भवन निर्माण के साथ प्रक्रियाओं को सरल बनाना भी सरकार की प्राथमिकता है।

ढाई साल में 1,572 कार्यों को ₹12,666 करोड़ से ज्यादा की मंजूरी

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद से लोक निर्माण विभाग को बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृतियां मिली हैं। पिछले ढाई वर्षों में ₹12,666 करोड़ से अधिक लागत के 1,572 कार्यों को मंजूरी दी गई है।

इनमें 1,285 सड़क निर्माण, 247 पुल निर्माण और 42 भवन निर्माण से जुड़े कार्य शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से राज्य में सड़क संपर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।

प्रशासनिक ढांचे का भी विस्तार

निर्माण कार्यों की निगरानी और उन्हें समय पर पूरा कराने के लिए विभागीय ढांचे में भी विस्तार किया गया है। पिछले ढाई वर्षों में 7 नए संभागीय कार्यालय और 12 नए उप संभागीय कार्यालय शुरू किए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर परियोजनाओं की निगरानी और विभागीय समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग लंबित अनुकंपा नियुक्तियों के मामलों के निराकरण पर भी ध्यान दे रहा है। सरकार का लक्ष्य ‘लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण’ के मूलमंत्र के साथ राज्य में अधोसंरचना विकास को नई गति देना है।

रायपुर में ट्रैफिक दबाव कम करने नई सड़कों और फ्लाईओवर की योजना

राजधानी रायपुर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए लोक निर्माण विभाग कई नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उप मुख्यमंत्री के मुताबिक, मोवा से झेरीखेड़ी तक करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए लगभग ₹100 करोड़ की योजना है। वहीं लाभांडी से सड्डू तक 5 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए भी करीब ₹100 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

इसके अलावा चंदनीडीह से रायपुरा तक बायपास विकसित करने की योजना है। रावांभाटा-बंजारी मंदिर के पास फ्लाईओवर और NH-30 पर कमल विहार गेट के पास फ्लाईओवर की परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य शहर के प्रमुख हिस्सों में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना है।

सड़कों की पांच साल तक होगी देखरेख

सड़कों के बेहतर रखरखाव के लिए विभाग OPRMC के तहत पांच वर्षीय मरम्मत व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। इसके पायलट प्रोजेक्ट के तहत सिमगा-तिल्दा-खोरा मार्ग और नयापारा-कुरूद मार्ग सहित प्रमुख सड़कों को दीर्घकालिक संधारण योजना में शामिल किया गया है।

विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में राज्य की अन्य महत्वपूर्ण सड़कों को भी पांच वर्ष की मरम्मत एवं रखरखाव व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य सड़कें बनने के बाद उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता को लंबे समय तक बनाए रखना है।

थर्ड पार्टी से होगी सड़क गुणवत्ता की जांच

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने बताया कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर थर्ड पार्टी जांच की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। इसके लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी विशेषज्ञ संस्था के माध्यम से गुणवत्ता परीक्षण कराने की योजना है।

सरकार का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया, मजबूत प्रशासनिक ढांचा, दीर्घकालिक सड़क रखरखाव और स्वतंत्र गुणवत्ता जांच के जरिए लोक निर्माण विभाग के कामकाज को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाएगा।

Tags: