नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर 2026 की बैठक में बड़ा फैसला लिया है। RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी** कर दी है। इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गई है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई छह सदस्यीय MPC की तीन दिवसीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है, जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इससे अप्रैल, जून और अगस्त की बैठकों से जारी नीतिगत दरों में स्थिरता का दौर खत्म हो गया।

महंगे हो सकते हैं होम लोन और EMI

रेपो रेट बढ़ने का असर आम लोगों के लिए सबसे ज्यादा कर्ज की लागत पर पड़ सकता है। RBI की नीतिगत दर बढ़ने से बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर देखने को मिल सकता है।

अगर बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के साथ-साथ फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा लोन ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ा रेपो रेट

RBI ने फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। केंद्रीय बैंक के सामने इस समय वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई से जुड़ी चुनौतियां हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में RBI के सामने आर्थिक वृद्धि के साथ महंगाई को नियंत्रित रखने की चुनौती है।

SDF, MSF और बैंक रेट में भी बदलाव

मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान RBI ने दूसरी प्रमुख नीतिगत दरों में भी बदलाव किया है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.25 फीसदी कर दी गई है।

वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.75 फीसदी पर समायोजित किए गए हैं।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक स्तर पर महंगाई में दोबारा तेजी आने की आशंका को लेकर चिंता जताई है।

अगस्त में बढ़ी खुदरा महंगाई

महंगाई के मोर्चे पर भी RBI के सामने चुनौती बढ़ी है। अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी।

इसके अलावा अल नीनो प्रभाव और कम बारिश के कारण रबी फसल के उत्पादन को लेकर भी जोखिम की बात सामने आई है। इन परिस्थितियों में खाद्य कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर तुरंत हर ग्राहक की EMI पर पड़े, यह जरूरी नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव बैंक की ब्याज दरों, लोन के प्रकार और ग्राहक की ब्याज दर व्यवस्था पर निर्भर करेगा। हालांकि, अगर बैंक अपनी लेंडिंग रेट बढ़ाते हैं तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्ज की EMI महंगी हो सकती है।

RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय बैंक को एक तरफ महंगाई पर काबू रखना है और दूसरी तरफ आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को भी संतुलित रखना है।

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