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लांजी क्षेत्र में फर्जी पत्रकारों की बाढ़ से शासकीय अधिकारी कर्मचारी परेशान

सफिक खान,लांजी। पत्रकारिता य तो लोकतंत्र का चौथा यू स्तम्भ माना जाता है, पत्रकार वही होता है, जिसके सवालों में दम और बेबाक लेखनी का मालिक हो जिसके लेख से समाज, गांव, शहर व देश का भला होता हो, लेकिन साहब यहां तो पत्रकार नहीं बल्कि ब्लैकमेलरों की संख्या ज्यादा नज़र आती हैं।

ऐसे कथित पत्रकार जिन्हें न पढ़ना आता, न बोलने का कोई तरीका है और न ही सवालों का कोई पता और न ही पत्रकारिता की सही मायने में कोई समझ है। सिर्फ ब्लैकमेलिंग और अवैध उगाही को पत्रकारिता समझते हैं, जिनके कारण पत्रकारिता में महारत रखने वाले सम्मानित पत्रकारों को भी कभी कभी अपमान का सामना करना पड़ जाता है। ऐसे कथित पत्रकार न डॉक्टर्स को देखते है, न किसी ठेले वाले को देखते इनका एक ही नारा और मकसद होता है पत्रकार है। पत्रकार रटना पराया माल अपना

इन कथित पत्रकारों की वजह से पत्रकारिता का स्तर गिर रहा है, और इनमें अकड़, एटीट्यूड बेशुमार दिखता हैं, जबकि अंदर न कोई ज्ञान होता है और न ही शिक्षा उनके पास होती है। कथित पत्रकारों का रेला 15 अगस्त और 26 जनवरी के करीब आते ही लांजी एवं लांजी क्षेत्र में सक्रिय हो जाता है जिससे स्थानीय हॉकर और पत्रकार तो परेशान ही है साथ ही शासकीय अधिकारी और कर्मचारी भी परेशान रहते हैं। जिसकी खास वजह है, कथित पत्रकार दो खास पर्वो पर इनके पास पहुँच करफर्जी पत्रकार विज्ञापन के नाम पर अवैध उसूली करते है और अवैध उसूली नहीं होती तो सूचना का अधिकार लगाने की धमकी देते हैं जिससे स्थानीय हॉकर एवं पत्रकारो को नुकसान उठाना पड़ता है। चूंकि पूरे वर्ष स्थानीय हॉकर एवं पत्रकारों के द्वारा शासकीय योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जाता है जिसका लाभ स्थानीय हॉकर या पत्रकार को मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नही है। और बाहरी पत्रकार इसका भरपूर फायदा उठाते हैं। इसलिए सभी से अपील है कि फर्जी पत्रकारों को किसी भी प्रकार का कोई विज्ञापन न दीया जाएं और ब्लैकमेलिंग करने पर इनके खिलाफ शिकायत कि जाएं।

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