पति के बाद दो बेटों को खोने का गम, अध्यापिका बन बच्चों को पढ़ाया शिक्षा का पाठ, फिर अचानक पॉलिटिक्स में एंट्री, कुछ ऐसा है राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के राजनीतिक करियर तक का सफर, पढ़ें…

नई दिल्ली: देश में इन दिनों सियासत गरमाई हुई है. महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल मचा हुआ है. वहीँ इस बीच राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी सरगर्मियां तेज है. अगले महीने 18 जुलाई को देश के सर्वोच्च पद यानी राष्ट्रपति पद के लिए मतदान होना है।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए जहां भारत के सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया है तो वहीँ विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. राष्ट्रपति चुनाव में यदि भाजपा की महिला उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू विजयी होती हैं तो वह भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति बन जाएंगी। बता दें कि इसके पहले प्रतिभा पाटिल को भारत की पहली महिला राष्ट्रपति होने का गौरव प्राप्त हुआ था।

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भाजपा की महिला उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू 24 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। चुनावी सरगर्मियों के बीच आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिये द्रौपदी मुर्मू के जीवन और राजनीतिक करियर के बारे में विस्तार से बताते हैं.

द्रौपदी मुर्मू (जन्म : 20 जून 1958) एक भारतीय महिला राजनेत्री हैं। भारत के सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भारत के अगले राष्ट्रपति के लिये उनको अपना प्रत्याशी घोषित किया हैं। इसके पहले 2015 से 2021 तक वे झारखण्ड की राज्यपाल थीं। उनका जन्म ओड़िशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था।

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व्यक्तिगत जीवन
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओड़िशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडु था। उनके दादा और उनके पिता दोनों ही उनके गाँव के प्रधान रहे।

उन्होंने श्याम चरण मुर्मू से विवाह किया। उनके दो बेटे और एक बेटी हुए। दुर्भाग्यवश दोनों बेटों और उनके पति तीनों की अलग-अलग समय पर अकाल मृत्यु हो गयी। उनकी पुत्री विवाहिता हैं और भुवनेश्वर में रहतीं हैं। द्रौपदी मुर्मू ने एक अध्यापिका के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन आरम्भ किया। उसके बाद धीरे-धीरे राजनीति में आ गयीं।

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राजनीतिक जीवन
द्रौपदी मुर्मू ने साल 1997 में राइरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन का आरंभ किया था।

उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। साथ ही वह भाजपा की आदिवासी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं है।

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले की रायरंगपुर सीट से 2000 और 2009 में भाजपा के टिकट पर दो बार जीती और विधायक बनीं। ओडिशा में नवीन पटनायक के बीजू जनता दल और भाजपा गठबंधन की सरकार में द्रौपदी मुर्मू को 2000 और 2004 के बीच वाणिज्य, परिवहन और बाद में मत्स्य और पशु संसाधन विभाग में मंत्री बनाया गया था.

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द्रौपदी मुर्मू मई 2015 में झारखंड की 9वीं राज्यपाल बनाई गई थीं। उन्होंने सैयद अहमद की जगह ली थी। झारखंड उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने द्रौपदी मुर्मू को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई थी।

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का खिताब भी द्रौपदी मुर्मू के नाम रहा। साथ ही वह किसी भी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी भी हैं।

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