President-Vice President Election: कैसे होता है राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति का चुनाव, कौन बन सकता है उम्मीदवार? यहां जानिए आंकड़ों से लेकर छोटी से बड़ी हर एक बात…

नई दिल्ली: देश में इन दिनों राज्यसभा चुनाव के साथ ही राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी चर्चा का बाजार गरम हो गया है. फ़िलहाल तो राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि इसके बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए इलेक्शन होना है। देश में इन दिनों भाजपा फुल फॉर्म में नजर आ रही हैं.

वहीँ अगर बात आंकड़ों के लिहाज से करें तो लोकसभा, राज्यसभा और अलग-अलग विधानसभा में सदस्यों के हिसाब से भाजपा काफी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में राजनीतिक पंडितों से लेकर हर किसी की निगाहें भाजपा के संभावित उम्मीदवार पर टिकी हुई है। इसे लेकर अटकलों का बाजार भी तेज हो गया है. आइये इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं…

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खबरों में आगे बढ़ने से पहले ये जान लीजिये कि राष्ट्रपति का चुनाव आखिर होता कैसे है? राष्ट्रपति के इलेक्शन में लोकसभा, राज्यसभा के सभी सांसद और सभी राज्यों के विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं.

हालांकि इन सभी के वोट की अहमियत यानी वैल्यू अलग-अलग होती है। इतना ही नहीं अलग-अलग राज्य के विधायक के वोट की वैल्यू भी अलग होती है। राष्ट्रपति चुनाव में एक सांसद के वोट की कीमत 708 होती है। वहीं, विधायकों के वोट की अहमियत उस राज्य की आबादी और सीटों की संख्या पर डिपेंडेंट होती है.

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राष्ट्रपति चुनाव वाले को भारत का नागरिक होना जरूरी है. बात करें उम्र की तो इसके लिए 35 वर्ष से अधिक की आयु होनी चाहिए। इलेक्शन लड़ने वाले में लोकसभा का सदस्य होने की पात्रता होनी चाहिए। साथ ही इलेक्टोरल कॉलेज के पचास प्रस्तावक और पचास समर्थन करने वाले होने चाहिए।

जैसा कि पूर्व में बताया जा चुका है कि राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधानसभा के सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। फ़िलहाल 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में अभी 230 सांसद हैं। जून और जुलाई में 57 सदस्यों की सदस्यता समाप्त हो रही है, हालांकि इनमें से 41 सीटों पर निर्विरोध सदस्य चुने जा चुके हैं, जबकि बची हुई सीटों पर 10 जून को इलेक्शन संपन्न हो जायेंगे।

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ध्यान देने वाली बात ये भी है कि राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 राज्यसभा सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं रखते हैं. राज्यसभा के बाद अब नजर डाल लेते हैं लोकसभा में सदस्यों की संख्या पर, तो 543 सदस्यों वाली लोकसभा में अभी 540 सांसद हैं, जबकि तीन सीटें खाली हैं। इन पर भी चुनाव की प्रक्रिया जारी है।

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ऐसे में ये तो स्पष्ट है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की सभी खाली सीटों पर उपचुनाव संपन्न कराए जायेंगे। फिर चुने गए सदस्य राष्ट्रपति इलेक्शन में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। हालाँकि इन सबके बीच ये तो साफ़ है कि भाजपा के माननीयों की संख्या काफी ज्यादा है, इस लिहाज से चुनाव में उनका दबदबा ज्यादा देखने को मिलेगा।

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