स्टाम्प चोरी कर बना अरबपति, ऐसे करता था खेल, पढ़ें इस रैकेट का कैसे हुआ भंडाफोड़…

अविनाश चंद्रवंशी/नई दिल्ली। अपराध के कैसे-कैसे रंग होते है और इसका रूप अनेक हैं। अपराध करने के अलग-अलग ढंग होते हैं। न अपराध समाज से दूर हो सकता है और न समाज से अपराध से मुक्त।अपराधी और अपराध हमेशा से एक आम आदमी के लिए कौतुहल और जिज्ञासा का विषय रहा है .लेकिन उसका स्वरुप अलग था तरीका अलग था. द्वापर युग, त्रेतायुग और सतयुग सभी युगों में अपराध और अपराधियों से धरा आबाद भी भी रहा।

हम अपने इस क्राइम की कहानी में हरबार हमारे पाठकों के लिए अलहदा अपराध की कथा लेकर आते है। हमारा प्रयाश होता है केवल अपराध और अपराधी के कृत्यों का महिमा मंडल या बखान ही न करे बल्कि इस कार्यक्रम के अंत में इस संदेश के माध्यम से आपको वाकिफ कराते हंै की अपराध कैसा भी हो छुपता नहीं है।

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ये कठोर सत्य है कि कानून के हाथ बेहद लम्बे होते है और ये सच भी लगता है। इस देश की कानून से आज-तक बच पाया हो ऐसा प्रतीत नहीं होता और अगर इस कानून से वो बच गया तो प्रकृति के कानून से वो अवस्य दण्डित हुआ है। आज क्राइम के कहानी में हम बात करेंगे एक ऐसे स्टाम्प चोर की जो किसी समय में दाने दाने को मोहताज था उसके घर में केवल एक वक्त का ही चूल्हा जल पता था जितना अन्न उसके घर में बनता था उसमे उसके परिवार के लोगों का पेट भर जाए ऐसा शायद ही हो पाता लेकिन समय ने पलटा खाया। देखते ही देखते वो खरबों का मालिक बन गया।

लेकिन कहते हैं ना गलत काम से कमाया गया धन जितनी तेजी जीवन में प्रवेश करता है उतनी ही दस गुना तेजी से रोग, शोक और पतन का कारण बनते हुवे वो धन इंसान के जीवन से दूर भी हो जाता है।

हम बात कर रहें है हिन्दुस्तान के सबसे बड़े स्टाम चोर अब्दुल करीम तेलगी का…जो 20 हजार करोड़ रुपये के स्टाम्प घोटाले का मास्टरमाइंड था , रेलवे में एक मामूली कर्मचारी के घर जन्मे अब्दुल कर्नाटक के खानपुर में हुआ था करीम जब छोटा था तभी उसके पिता का साया उसके सर से उठ गया। पिता के देहांत के बाद परिवार इतने बुरे दौर से गुजरा की उन्हें स्टेशन में मूंगफली तक बेचना पड़ा।

बाद में तेलगी ने कर्नाटक से बी काम की पढ़ाई की और मुंबई चला आया। बाद में वो ज्यादा कमाई के लालच में सऊदी अरब चला गया कुछ दिनों के बाद सऊदी अरब से लौटते ही वो नकली सर्टिफिकेट और नकली पासपोर्ट बनाकर विदेश भेजता रहा। इसी दौरान इमिग्रेशन डिपार्टमेंट की नजर पड़ी और काफी समय तक उसे जेल की सलाखों के बिच रहना पड़ा। जेल में रहने के दौरान तेलगी की दोस्ती स्टाम्प व्यवसायी रतन सोनी से हुई , सोनी ने उसे बताया की बड़े स्टार पर स्टाम्प का गोरख धंधा कैसे किया जाता है।

1994 में तेलगी ने स्टाम्प विक्रेता का विधिवत लाइंसेंस ले लिया। इस लाइसेंस के मिलते ही सोनी और तेलगी असली और नकली स्टाम्प को मिलकर बेचने का अवैध धंधा शुरू कर दिया और करोड़ों कमाने लग गए।

इस गोरख धंधे से कमाए हुवे धंधे को तेलगी ने कई दूसरे व्यवसाय में इन्वेस्ट भी किया . बाद में अनबन के चलते रतन सोनी और तेलगी की राहे जुदा हो गयी. उसी वक्त तेलगी का स्टाम्प लाइसेंस भी निरस्त हो गया। लाइसेंस रद्द होते ही तेलगी ने अपना खुद का प्रेस खोलने का मन बनाया जिसमे उसका मकसद नकली स्टाम्प बेचना ही था। उसने अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी मशीन को बेकार घोषित करवा दिया और उसे कौंड़ियों के मोल खरीद भी लिया।

उसने इस काम के लिए अपने इस प्रेस में कई पढ़े लिखे बेरोजगार डिग्रीधारकों को नौकर पर रख लिया . 1992 से 2002 तक तेलगी पर करीब 25 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हुए। हालांकि वो अधिकारियों की मिलीभगत से 2001 तक कानून के शिकंजे से बचता रहा। आखिर कार 2001 के अंत में वो पकड़ा गया। तेलगी ने पूछ ताछ में बताया कि 18 शहरों में उसके 100 से भी ज्यादा बैंक अकाउंट है और 36 जगहों पर ऐसी प्रॉपर्टी है जिसे अकूत की श्रेणी में रखा जा सकता है। तेलगी की कूल संपत्ति 20 हजार करोड़ रुपये आकी गयी थी जो उसने स्टाम्प घोटाले से कमाया था।

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2006 में अब्दुल करीम को 30 वर्ष की कैद और 202 करोड़ रुपये की जुर्माने की सजा सुनाई गई। इस दौरान उसे बंगलुरु जेल में रखा गया था. सूत्र बताते है कि जेल में अब्दुल करीम को सारे ऐशोआराम की सुविधा मिलती थी जो अच्छे अच्छे वीवीआईपी को भी नसीब नहीं होता. बंगलुरु जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जब इस बात का खुलासा किया कि जेल में उसे स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है उसे चार पांच मसाजर भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं तो उस समय काफी हल्ला हुआ था।

जिस समय तेलगी नकली स्टाम्प के अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये कमा रहा था उस समय उसे एक बार डांसर तरन्नुम खान से मोहब्बत हो गयी . जिसपर तेलगी ने एक रात में 93 लाख रुपये लूटा दिए। डाइबटीज और हाइ ब्लड प्रेशर के कारण मल्टीआर्गन फेलियर की समस्या हुई और 26 आॅक्टूबर 2017 को उसने अंतिम सांस ली। इस कहानी का सार ये कि अपराध वो मृगतृष्णा है जो दूर से लगता तो बेहद खूबसूरत है लेकिन जैसे ही इंसान इसपर पाँव रखता है वह धंसता चला जाता है।

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