एक्सक्लूसिव: परसा, घाटबर्रा कोल ब्लाक आवंटन में फंसा जिला पंचायत का पेंच, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी के सामने उठ चुका है हसदेव जंगल बचाने पर सवाल

प्रदीप शर्मा/अंबिकापुर/रायपुर। हसदेव रिजर्व फारेस्ट एरिया में शामिल (Parsa Coal Block) परसा, घाटबर्रा,साल्ही में कोल ब्लाक आवंटन का मामला सुलझने की बजाए उलझता जा रहा है। अब सरगुजा जिला पंचायत (District Panchayat proposal) की अध्यक्ष मधु सिंह ने कलेक्टर को पत्र लिखकर इस कोल ब्लॉक आवंटन के प्रस्ताव पर दोबारा ग्राम सभा बुलाने की मांग की है। इसके लिए बाकायदा जिला पंचायत में प्रस्ताव पारित कर उसकी कापी कलेक्टर को भेजी गई है।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हसदेव बचाने जानें क्या कहा था राहुल गांधी ने

खास बात ये है कि इससे पहले छत्तीसगढ़ के सरगुजा, सूरजपुर और कोरबा जिलों में फैले हसदेव अरण्य में कोयला खनन का मुद्दा लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University ) में उठा चुका है। वहां पहुंचे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से स्टूडेंट ने इसके बारे में सवाल किया था।

जवाब में राहुल गांधी ने कहा, वे इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर बात कर रहे हैं। जल्दी ही इसका नतीजा दिखेगा। बावजूद इसके जंगलों की कटाई, भूमि अधिग्रहण का काम जारी है। बता दें ये खदानें राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित है, जिसका देशभर में विरोध हो रहा है।

जिला पंचायत का सवाल: ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोयला उत्खनन की अनुमति कैसे

सरगुजा कलेक्टर को भेजे गए प्रस्ताव में जिला पंचायत अध्यक्ष मधु सिंह ने कहा है, घाटबर्रा और साल्ही के ग्रामीणों ने बताया है कि कोयला खनन के लिए ग्राम सभा से जो अनुमति ली गई है वह शंकास्पद है। ग्रामीणों का कहना है, 28 अगस्त 2017 को फतेहपुर, 24 जनवरी 2018 को हरिहरपुर और 27 जनवरी 2018 को साल्ही गांव में हुई ग्राम सभा में कोयला उत्खनन की अनुमति से जुड़े किसी प्रस्ताव पर चर्चा ही नहीं हुई थी।

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इसे बाद में दस्तावेजों में शामिल कर लिया गया, जो कि अवैध है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने सामान्य सभा में पारित प्रस्ताव की जानकारी देते हुए कलेक्टर को लिखा है, त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था तभी सुदृढ़ हो सकती है जब पंचायतों के अधिकारों का सम्मान हो।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव लाए थे प्रस्ताव

जिला पंचायत की सामान्य सभा में यह प्रस्ताव उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव लाए थे। उनका कहना है कि, पिछले दिनों उदयपुर ब्लॉक में जनसंपर्क के दौरान हरिहरपुर में धरना दे रहे लोगों से मुलाकात हुई थी। ग्रामीणों ने उन्हें बताया था, ग्रामसभा की फर्जी अनुमति लगाकर कोल ब्लॉक आवंटित करा लिया गया है।

ग्रामीणों ने फिर से ग्राम सभा कराने की मांग की थी। बाद में सामान्य सभा की बैठक में निर्णय लिया गया कि ग्रामीणों की मांग का हम समर्थन करेंगे। बता दें कि आदित्येश्वर शरण सिंहदेव, प्रदेश के पंचायत, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के भतीजे भी हैं।

प्रदेश भर में हो रहा है विरोध

बता दें कि हसदेव में खनन गतिविधियों के खिलाफ प्रदेश भर में आक्रोश बढ़ रहा है। कई संगठन अलग-अलग मंचों से इसका विरोध कर रहे हैं। लगभग हर रोज कहीं न कहीं इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं।

परसा कोल ब्लॉक से प्रभावित गांवों के लोग वहां करीब तीन महीनों से धरने पर बैठे हैं। वहीं ग्रामीण जंगलों में पेड़ों की रखवाली करते घूम रहे हैं। विभिन्न अदालतों में भी इससे जुड़े मामले चल रहे हैं।

परसा ईस्ट केते बासन विस्तार के लिए आज घाटबर्रा में ग्रामसभा

इस बीच सरगुजा कलेक्टर संजीव झा ने परसा ईस्ट केते बासन कोयला खदान के विस्तार के लिए उदयपुर के घाटबर्रा गांव में शनिवार को विशेष ग्राम सभा बुलाया है। इसमें PEKB के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास आदि प्रस्तावों पर बात होनी है। इस खदान की स्वीकृति 2012 में हुई थी।

बता दें कि इसमें खनन जारी है। इसकी वजह से घाटबर्रा गांव का लगभग पूरा जंगल खत्म हो चुका है। अब गांव के कुछ हिस्सों पर सहमति लेने की कोशिश हो रही है ताकि खदान का विस्तार किया जा सके। यह खदान भी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित है।

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