जाने क्या है पैंडोरा पेपर्स, जिसमे शामिल है Anil Ambani और Sachin Tendulkar जैसे बड़े नाम

दुनियाभर के राजनेताओं एवं अन्य लोगों के लिए पैंडोरा पेपर्स (pandora papers) एक ऐसा पेपर है जिसका दुनियाभर के राजनेताओं, अरबपतियों और अन्य मशहूर हस्तियों ने किस तरह धन बचाने और जमा करने के लिए टैक्स पनाहगाहों का इस्तेमाल किया है. इस खुलासे में ऐसी 29 हजार कंपनियों और ट्रस्ट का पता चला है जिन्हें विदेशों में बनाया गया था. इंटरनेशनल कन्सॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने एक साल तक अध्ययन के बाद ऐसा दावा किया गया है कि विभिन्न देशों के व्यापारियों, उद्योगपतियों, राजनेताओं और खेल व मनोरंजन जगत की मशहूर हस्तियों ने अपना धन छिपाया. भारत के कई बड़े नाम इस पड़ताल में भारत का अखबार इंडियन एक्सप्रेस शामिल था.

अखबार के मुताबिक इन दस्तावेजों में 300 से ज्यादा भारतीयों के नाम हैं जिनमें उद्योपति अनिल अंबानी (Anil Ambani), नीरव मोदी की बहन और किरन मजूमदार शॉ के पति जैसे लोग शामिल हैं. तस्वीरेंः पैराडाइस पेपर्स याद हैं आपको? इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 60 से ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों और कंपनियों की पड़ताल की गई है जिनका खुलासा आने वाले दिनों में किया जाएगा. अखबार लिखता है कि पनामा पेपर्स के खुलासे के बाद धनकुबेरों ने अपना धन छिपाने के नए तरीके खोज लिए हैं.

मिसाल के तौर पर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने पनामा पेपर्स खुलासे के सिर्फ तीन महीने बाद ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स में अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी. सचिन तेंदुलकर के वकील ने कहा है कि उनका सारा निवेश वैध है. अब भारतीय उद्योगपति विदेशों में कई ट्रस्ट स्थापित कर रहे हैं ताकि अपने धन को अलग अलग हिस्सों में बांटकर सरकारी निगाहों से बचा जा सकें. इनमें भारत, रूस, अमेरिका और मेक्सिको समेत कई देशों के 130 अरबपति शामिल हैं.

सैकड़ों नेताओं के नाम विदेशों के जिन बड़े लोगों के नाम पैंडोरा पेपर्स (pandora papers)खुलासे में उजागर किए गए हैं उनमें जॉर्डन के राजा, उक्रेन, केन्या और इक्वेडोर के राष्ट्रपति, चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर शामिल हैं. इन दस्तावेजों में कम से कम 35 मौजूदा या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों के नाम लिए गए हैं. दस्तावेज दिखाते हैं कि किस तरह किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने मैलिबु, कैलिफॉर्निया, वॉशिंगटन और लंदन में अपनी 100 मिलियन डॉलर की संपत्तियां बनाने के लिए कर से राहत देने वाली जगहों पर कंपनियों का एक नेटवर्क खड़ा किया.

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