Electricity Crisis: अगर ऐसा हुआ तो देश में छा जाएगा अंधेरा

  • नई दिल्ली। चीन अब तक के सबसे बड़े बिजली संकट के दौर से गुजर रहा है। जानकार कहते हैं कि भारत में ऐसा दौर आ सकता है जब कि देश को बिजली की कमी का सामना करना पड़े। अगर ऐसा होगा तो यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक सिद्ध होगा। क्योंकि कोरोना के चलते पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था उबरने की कोशिश कर रही है।
    दरअसल देश के पावर प्लांट्स के पास सिर्फ तीन दिन का ही कोयला बचा है। अगर इसकी आपूर्ति जल्द नहीं की गई तो इन पावर प्लांट्स में उत्पादन ठप हो जाएगा। देश के मौजूदा हालात की अगर बात करें तो कोरोना के कम होते मामलों और बढ़ते टीकाकरण के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में बूम आ रहा है। जिसके कारण कंपनियों पर दबाव है कि वे ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर पिछले दो सालों में सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकें। इसके लिए कंपनियों ने अपना उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है जिसके कारण इन औद्योगिक इकाइयों को ज्यादा बिजली आपूर्ति की जा रही है। यही वजह है कि कोरोनाकाल के बाद अप्रत्याशित रूप से बिजली की मांग में इजाफा हुआ है। इस मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पान करने वाले प्लांट्स पर जबरदस्त दबाव है। जिसके कारण भी ऐसा कहा जा रहा है कि देश में आने वाले समय में बिजली संकट देखनेे को मिल सकता है।

कोयला बन रहा है बड़ी वजह

  • इसमें कोयला का स्टॉक भी बिजली कमी का कारण बन रहा है। दो महीने से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कोयले का पर्याप्त स्टॉक जमा नहीं हो पा रहा है। जिसके कोयले की आपूर्ति बाधित हुई है।
  • चीन ने भी कुटिल चाल चलते हुए आस्ट्रेलिया से आ रहे व्हाया चीन भारत आ रहे कोयले के स्टॉक अपने बंदरगाहों पर होल्ड कर लिया है। बताते चलें कि चीन में सबसे पहले बिजली संकट की शुरुआत हो चुकी है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के दामों में इजाफा हो गया। हालांकि बाद में कुछ हद तक इस पर काबू पाने की कोशिश की गई लेकिन इस तेजी ने अपना असर कुछ हद तक दिखा ही दिया था।
  • बताया जाता है कि पांच राज्यों जिनमें एमपी, तमिलनाड़ु, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को एक बड़ी रकम बिजली कंपनियों को देनी है। ये रकम अभी तक इन कंपनियों को नहीं मिली है, जिसके कारण कंपनियों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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