Andaman का वो रहस्यमयी द्वीप , जहां जाने पर प्राचीन जनजाति के लोग करते हैं हमला

अंडमान के उत्तरी सेंटीनेल द्वीप (island) में रहने वाली सेंटिनेली एक प्राचीन जनजाति है, इनकी आबादी 50 से 150 के क़रीब ही रह गई है. उत्तरी सेंटिनेल द्वीप (island)  एक प्रतिबंधित इलाका है और यहां आम इंसान का जाना बहुत मुश्किल है. यहां तक कि वहां भारतीय भी नहीं जा सकते.

वैज्ञानिकों का मानना है कि सेंटिनेली जनजाति के लोग करीब 60 हज़ार साल पहले अफ़्रीका से पलायन कर अंडमान में बस गए थे. भारत सरकार के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इस जनजाति को बचाने की कोशिशें कर रहे हैं.

अमेरिकी मिशनरी की हत्या
जहाज का मलबा सेंटिनल के स्वदेशी आदिवासियों के घर में फंसा हुआ है, जिन्होंने खुद को बाहरी दुनिया से अलग रखा है और इसके लिए ये कई बार बल का प्रयोग भी करते हैं। नवंबर 2018 आदिवासी सुर्खियों में आए जब उन्होंने John Allen Chau नाम के एक अमेरिकी ईसाई मिशनरी की हत्या कर दी। खबरों के मुताबिक वह द्वीप में अवैध रूप से घुसा था और आदिवासियों का धर्मांतरण करवाना चाहता था।

फंसने के लिए इससे बुरी कोई जगह नहीं
ईसाई मिशनरी को द्वीप (island) तक पहुंचाने वाले मछुआरों के मुताबिक आदिवासियों ने चाऊ पर तीर बरसाए और घसीटते हुए उसके शव को समुद्र के किनारे तक ले गए, जहां उसे दफना दिया गया। द्वीप (island) के खौफनाक इतिहास के कारण सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि उत्तरी सेंटिनल द्वीप (island) के अलावा ऐसी कई जगहें हैं जहां जहाज का मलबा छोड़ा जा सकता था। एक यूजर ने लिखा, ‘जहाज खराब होने के लिए इससे बुरी जगह नहीं हो सकती।’

संपर्क के लिए तैयार नहीं आदिवासी
एक यूजर ने लिखा, ‘यह यात्रियों के लिए एक बुरा दिन रहा होगा।’ यह द्वीप (island) दक्षिण अंडमान प्रशासनिक जिले के अंतर्गत आता है जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (भारतीय केंद्र शासित प्रदेश) का हिस्सा है। व्यवहारिक रूप से भारतीय अधिकारी द्वीपवासियों की अकेले रहने की इच्छा का स्वीकार करते हैं और अपनी भूमिका को सिर्फ दूर से निगरानी तक ही सीमित रखते हैं। चाऊ की हत्या से पहले भी लोगों ने आदिवासियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की लेकिन उन्हें सिर्फ प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button