अक्षय ऊर्जा से युवाओं को मिलेगा रोजगार, प्रदेश में बस यहां होती है पढ़ाई पढ़िए पूरी खबर

बी.वॉक. पाठ्यक्रम में प्रवेश की अंतिम तिथि 29 सितम्बर

रायपुर। कौशल विकास मिशन के तहत अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान एकमात्र पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में है। जहां सौर, पवन, बॉयोमास भूतापीय एवं अन्य अक्षय ऊर्जा श्रोतो एवं उनके उत्पादन के बारे में अध्ययन कराया जाता है। यह कार्यक्रम अक्षय ऊर्जा विभाग में आयोजित किया गया। जहां कुलपित प्रो. केशरी लाल वर्मा ने कहा कि अक्षय ऊर्जा इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम वर्तमान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, और देश के कुछ निजी एवं सरकारी विश्वविद्यालयों सहित उच्च अध्ययन के लिए उपलब्ध करया गया है। छत्तीसगढ़ में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय इस पाठ्यक्रम को शुरू करने वाला पहला उच्च शिक्षा संस्थान है। जहां बी.वॉक पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 29 सितम्बर है।

युवाओं को नौकरी दिलाने में मददगार
इस कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि पाठ्यक्रम के साथ, हम आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में छात्र अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए अनुसंधान कर सकते हैं। अगर ऊर्जा मानवता का भविष्य है, तो ऊर्जा इंजीनियर भविष्य की आशाएं हैं। निकट भविष्य में जीवाश्म ईंधन की आसन्न समाप्ति के साथ, दुनिया को ऊर्जा स्रोतों की कमी का भी सामना करना पडे़गा। इसलिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास की आवश्यकता है।

प्रदेश का नाम बनाने में अहम भूमिका
कुलसचिव डॉ गिरीश कांत पाण्डेय ने बताया कि छत्तीसगढ़ को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में देश में नाम बनाने के लिए अभूतपूर्व पाठ्यक्रम सिद्ध होगा। उन्होंने कहा आज राज्य के सौर पंप तथा सोलर पैनल इंस्टालेशन में हमारे विश्वविद्यालय के छात्रों का महत्वपूर्ण योगदान है। अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान में यूजीसी द्वारा बैचलर ऑफ वोकेशन पाठ्यक्रम राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

पर्यावरण प्रदूषण रोकने में मददगार 
इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय तिवारी ने कहा कि अक्षय ऊर्जा में कौशल विकास आधारित स्नातक पाठ्यक्रम एक रोजगार प्रदान करने वाला पाठ्यक्रम है। इससे अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में होने वाले प्रतियोगिता परीक्षाओं के अलावा राज्य एवं केंद्र के समस्त प्रतियोगिता परीक्षाओं जैसे पीएससी, यूपीएससी, व्यापम, एसएससी, रेलवे एवं अन्य सभी में भी सम्मिलित होने का अवसर मिलता है। प्रो. तिवारी ने बताया कि दुनिया में बढते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिये कई प्रयास किये जा रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिये पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन की बजाय अक्षय ऊर्जा को वरीयता दी जा रही है। इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश काफी आगे है।

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