नवम्बर में लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण (second lunar eclipse), जानिए किस राशि पर पड़ेगा क्या प्रभाव ?

जानिए साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण कब लगेगा, इसके साथ ही इसे कब, कहां और कैसे देखा जा सकेगा-

चंद्र ग्रहण को ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व होने के साथ ही ज्योतिषीय महत्व भी है। ग्रहण के दौरान किसी भी तरह का मांगलिक या शुभ कार्य करने की मनाही होती है। इस दौरान अपने ईष्ट देव की अराधना मन ही मन की जाती है। जानिए साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण कब लगेगा, इसके साथ ही इसे कब, कहां और कैसे देखा जा सकेगा-

कब लगेगा साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण : साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को लगेगा।

चंद्र ग्रहण कब और कहां देखा जा सकेगा :

चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगा और शाम 05 बजकर 33 मिनट पर समाप्त होगा। ये आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इसे भारत समेत यूरोप और एशिया के ज्यादातर हिस्सों में देखा जा सकेगा। इसके अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर में दिखाई देगा।

भारत में मान्य होगा सूतक काल?

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में उपछाया ग्रहण के रूप में दिखेगा। इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

किस राशि पर लगेगा ग्रहण :

हिंदू पंचांग अनुसार, चंद्र ग्रहण विक्रम संवत 2078 में कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन वृषभ राशि और कृत्तिका नक्षत्र में लगेगा। ऐसे में इस राशि और नक्षत्र में जन्मे लोगों पर ग्रहण का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। वृषभ राशि के जातकों को बेहद सतर्क रहना होगा। इस दौरान वाद-विवाद से बचें। समुद्र मंथन के दौरान स्वर्भानु नामक एक दैत्य ने छल से अमृत पान करने की कोशिश की थी। तब चंद्रमा और सूर्य की इस पर नजर पड़ गई थी। इसके बाद दैत्य की हरकत के बारे में चंद्रमा और सूर्य ने भगवान विष्णु को जानकारी दे दी। भगवान विष्णु ने अपने सुर्दशन चक्र से इस दैत्य का सिर धड़ से अलग कर दिया। अमृत की कुछ बंदू गले से नीचे उतरने के कारण ये दो दैत्य बन गए और अमर हो गए। सिर वाला हिस्सा राहु और धड़ केतु के नाम से जाना गया। माना जाता है कि राहु और केतु इसी बात का बदला लेने के लिए समय-समय पर चंद्रमा और सूर्य पर हमला करते हैं। जब ये दोनों क्रूर ग्रह चंद्रमा और सूर्य को जकड़ते लेते है तो ग्रहण लगता है और इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है और दोनों ही ग्रह कमजोर पड़ जाते हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।

 

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