इंडिया

Central government करेगी भिखारियों (beggars) का कल्‍याण, इन प्रोजेक्ट्स के तहत खर्च करेगी 200 करोड़

सपोर्ट फार मार्जिनलाईज्ड इनडिविजुअल्स फार लाइवलीहुड एंड इंटरप्राइज योजना की होगी शुरुआत

इंडिया | अक्सर सड़क पर गुजरते हुए, किसी सफर में, मंदिरों के आसपास और अन्य जगहों पर आपको बड़ी संख्या में भिखारी दिख जाते होंगे. 2-5-10 रुपये से आप उन नि:सहाय, गरीब, लाचारों की मदद भी कर देते होंगे. लेकिन भिक्षाटन से उनकी जिंदगी तो नहीं बदलने वाली. वर्षों से आप भी देखते आ रहे होंगे. सरकार की ओर से भी भिखारियों (beggars) के कल्याण के लिए प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन नतीज़े नहीं निकले है.

अब केंद्र सरकार ने भिखारियों (beggars) के कल्‍याण के लिए SMILE यानी सपोर्ट फार मार्जिनलाईज्ड इनडिविजुअल्स फार लाइवलीहुड एंड इंटरप्राइज योजना के नए चरण की शुरुआत की है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से भिखारियों (beggars) के पुनर्वास और आजीविका के लिए उपाय किए जाएंगे. आइए जानते हैं इस योजना के बारे में विस्तार से.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से भिक्षावृत्ति में लगे लोगों का पूरी तरह से पुनर्वास किया जाएगा. अगले 10 साल तक उनके रहने-खाने से लेकर पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य और स्किल ट्रेनिंग का पूरा खर्च मंत्रालय उठाएगा. फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस योजना के तहत दिल्ली समेत देश के 10 बड़े शहरों को भिखारियों से मुक्त बनाने की तैयारी है. चयनित 9 शहरों में भिखारियों की सही संख्या पता लगाने के लिए सर्वे हो चुका है. महिला और बच्चों समेत दिल्ली में इनकी संख्या 20 हजार से ज्यादा है.

पायलट प्रोजेक्ट में ये 10 शहर हैं शामिल

पहले चरण में दिल्ली समेत जिन 10 शहरों से भिक्षावृत्ति खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने काम शुरू किया है, उनमें सफलता के बाद अन्य शहरों में भी योजना लागू की जाएगी. इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, पटना, इंदौर, चेन्नई, बेंगलुरु, नागपुर, हैदराबाद, लखनऊ और अहमदाबाद शामिल हैं. पहले इसमें अहमदाबाद की जगह कोलकाता का नाम शामिल था, लेकिन बंगाल की ममता सरकार के असहयोग का हवाला देते हुए केंद्र ने कोलकाता को इस पायलट प्रोजेक्ट से अलग कर दिया.

भिखारी का पूरा डाटा तैयार

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक इस योजना के तहत प्रत्येक भिखारी का पूरा डाटा तैयार किया गया है. इसमें भिक्षाटन वाले क्षेत्र, उनकी शैक्षणिक योग्यता, स्वास्थ्य वगरह की डिटेल है. इनमें ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है, जिनके पास उनकी पहचान से जुड़ा कोई डॉक्युमेंट नहीं है. ब्यौरे के आधार पर उनका पुनर्वास किया जाएगा. उनकी पढ़ाई-लिखाई, स्किल डेवलपमेंट, ट्रेनिंग वगैरह की योजना पर काम चल रहा है.

अगले 5 वर्ष में 200 करोड़ रुपये खर्च

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अगले पांच वर्षो में इस पूरी योजना पर 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. साथ ही भिखारियों के पुनर्वास पर 10 साल का समय दिया जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि मंत्रालय का मानना है कि जब तक उनके रहन-सहन की आदतें पूरी तरह से नहीं बदलेंगी, तब तक वे भिक्षावृत्ति का रास्ता नहीं छोड़ेंगे. उनके फिर से भिक्षावृत्ति से जुड़ने की आशंका को खत्म करने के लिए यह फैसला लिया गया है. 10 शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे देश के अन्य 100 शहरों में भी विस्तारित किया जाएगा.

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