गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan) कब करें, आइये जानते हैं

रायपुर। गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan) के दिन भद्रा व पंचक आदि को लेकर लोगों के मन में तरह तरह की अफवाह युक्त शँका शुरु हो जाती है कि भगवान गणेश जी का विसर्जन (Ganesh Visarjan) कब करें ? आइये जानते हैं राजधानी के महामाया मंदिर क पुजारी पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार विसर्जन की पूरी विधि।

पहले तो यह समझ लें कि हर तीज त्योहार एक निश्चित नक्षत्र के आसपास ही पडता है । जैसे – जन्माष्टमी – रोहणी नक्षत्र,तीजा – हस्त नक्षत्र, श्रावणी कर्म – श्रवण नक्षत्र में, गणेश स्थापना में भद्रा, राखी में भद्रा, होळी में भद्रा

पंडित शुक्ला के अनुसार गणेश विसर्जन/ अनंत चतुर्दशी के दिन भद्रा व पंचक अनिवार्य रूप से होता ही है चाहे दिन में पडे या रात में।

केवळ इन कार्यो का ही निषेध-

शव का अंतिम संस्कार , छत ढालना , दक्षिण दिशा की यात्रा करना , लकडी काटना, पलंग या चारपायी बनाना । 19 सितम्बर रविवार को अनन्त चतुर्दशी है । हवन करने के बाद पूरे दिन भर गणेश जी का विसर्जन(Ganesh Visarjan) सूर्यास्त के पहले तक किसी भी समय किया जा सकता है ,

इस सम्बन्ध में विद्वानो व ज्योतिषाचार्यो का कथन है कि –
भद्रा और पंचक ही केवल विघ्न नहीं हैं। व्यतिपात, कक्रजादि योग, मासदग्ध तिथियाँ, मासशून्य तिथियाँ , ग्रहण आदि अनेक चीजें हैं वो सब भी विघ्न ही हैं।
लेकिन भगवान गणेश तो विघ्नहर्ता स्वयं हैं इसलिए उन्हें अपने किसी कार्य के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं है। न स्थापना के समय न विसर्जन के समय।

इसके आलावा गणेश विसर्जन हमारा तात्कालिक निर्णय नहीं होता है। बल्कि जिस दिन हमने पूजा करने का निर्णय लिया उसके लिए शुभ मुहूर्त चुना तो पूजा के संकल्प में विसर्जन का संकल्प भाव भी मन में रहता ही है। इसलिए विसर्जन के लिए अलग से मुहूर्त देखने की अनिवार्यता नही रह जाती है। छत्तीसगढ़ में प्राचीन समय से चली आ रही क्षेत्रीय लोकाचार के अनुसार अनन्त चतुर्दशी को हवन करके उसी दिन या दूसरे दिन पूर्णिमा को दिनभर मूर्ति विसर्जन किया जाता है। इसलिये किसी भी तरह की सुनी सुनाई बातों में आकर आवाहित करके – निवेदन करके बुलाये हुए देव को समय पूर्व विसर्जित कर देना उनका अपमान है जिसका दुष्परिणाम अवश्यसम्भावी है।

उपरोक्त समस्त बातो को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरह की शँका न करके , विधि विधान से पूजा करें । तथा 19 तारीख रविवार को हवन करने के बाद तथा 20 तारीख सोमवार को दिनभर विसर्जन कर सकते है।किसी भी पार्थिव देवी देवता या पूजन पश्चात निर्माल्य सामग्रियों को दिन में , सूर्यास्त पूर्व ही नदी/तालाबों में विसर्जन करना चाहिये।

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