सीएम ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल का किया लोकार्पण, प्रदेश में होगा अंग्रेजी स्कूल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् को नमन करते हुए कहा कि पिछले वर्ष कोरोना के कारण शिक्षक दिवस का कार्यक्रम वर्चुअल रूप से आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडी तिवारी स्कूल में पहले मात्र 57 बच्चे पढ़ते थे। स्वामी आत्मानंद(swami atmanand) के नाम से अंग्रेजी माध्यम का शासकीय स्कूल प्रारंभ होने से अब यहां एक ह

जार से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद (swami atmanand) के नाम से रायपुर शहर में तीन शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए गए, यहां ऐसे बच्चों को प्रवेश मिला है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों की फीस, पुस्तक और गणवेश का खर्चा सरकार वहन करेगी।

स्वामी आत्मानंद(swami atmanand) के नाम से संचालित शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल की तर्ज पर अब प्रत्येक जिले में एक-एक हिन्दी माध्यम स्कूल खोले जाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर की है। बता दें कि राजधानी के आमापारा स्थित स्वामी आत्मानंद(swami atmanand) उत्कृष्ट विद्यालय योजना अंतर्गत संचालित आर.डी. तिवारी शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल के उन्नयन कार्य का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महापुरूषों के नाम से संचालित होने वाले स्कूल हमारी पहचान है। इन ऐतिहासिक स्कूलों का उन्नयन बहुउद्देशीय शाला के रूप में किया जाएगा। उन्होंने आरडी तिवारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल के खेल मैदान के लिए 2 करोड़ रुपए की मंजूरी प्रदान की। कार्यक्रम में कोरोना काल में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए नवाचार करने वाले 20 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। महतारी दुलार योजना के अंतर्गत कोरोना काल में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति के चेक भी प्रदान किए।

मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। आपदा के अवसर में बदलने का कार्य छत्तीसगढ़ के शिक्षकों द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम स्कूल की शुरूआत रायपुर से की गई इसके बाद जिलों में 27, उसके बाद 52 और अब 172 स्कूल संचालित हो रहे हैं। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का यह कारवां और भी आगे बढ़ेगा।

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