विधवा महिलाएं 5 दिन से भूख हड़ताल पर, एक ही मांग सिर्फ अनुकंपा नियुक्ति

रायपुर। छत्तीसगढ़ में दिवंगत पंचायत शिक्षकों की विधवा महिलाएं अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर 41 दिन से बूढ़ातालाब में अनिश्चितकालीन आंदोलन पर हैं. जब कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई, तो अब विधवा महिलाओं के साथ उनके बच्चे भी पिछले 5 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल (hunger strike) पर है. प्रदेश भर के करीब 1 हजार परिवार पिछले 13 साल से अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं. बच्चे अपनी मां से पूछते हैं कि घर कब आओगी. विधवा महिलाओं का कहना है कि धरना स्थल से नियुक्ति पत्र लेकर जाएंगे या फिर यही धरना देकर प्राण त्याग देंगे.

पंचायत दिवंगत अनुकंपा नियुक्ति संघ के प्रदेश अध्यक्ष माधुरी मिर्गे ने कहा कि पिछले 41 दिन से हड़ताल जारी है. हम सब विधवा महिलाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चौबीसों घंटे बैठे रहते हैं, लेकिन पिछले पांच दिन से भूख हड़ताल(hunger strike) में है. छोटे छोटे बच्चे भूख हड़ताल (hunger strike) में है, लेकिन वाह रे सरकार, एक भी व्यक्ति धरना स्थल पर मिलने नहीं पहुंचा हैं, ना ही हमारी मांगों पर कोई चर्चा हुई है. इसलिए क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं. इसके बाद भी अगर सुनवाई नहीं हुई, तो आमरण अनशन किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि यह महिलाओं की अपमान है. महिला सुरक्षा महिलाओं को लेकर बड़ी-बड़ी बात की जाती है, लेकिन वास्तविकता यही है कि महिलाओं की कोई सुनवाई नहीं है. पिछले 13 साल से हम अपने हक़ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. कानूनी रूप से भी यह हमारा हक है. हमारी एक सूत्रीय मांग है कि हमें अनुकंपा नियुक्ति दी जाए, क्योंकि इसके पहले दर्जनों बार ज़िम्मेदार अधिकारी विभागीय मंत्री सभी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है. किसी ने कुछ नहीं किया.

कांग्रेस सरकार को उनका वादा याद दिलाते हुए माधुरी मिर्गे कहा कि चुनाव के पहले वादा किया गया था कि सत्ता में आते ही हम लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी. आज 41 दिन से हड़ताल जारी है, जिसमें 36 दिन अनिश्चित कालीन उसके बाद अब पांच दिन से भूख हड़ताल जारी है, लेकिन कोई सूध ही नहीं लिया गया. उन्होंने कहा कि महिलाओं के पति के गुजरने के बाद आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है. पिछले 41 दिनों से बाल बच्चों के साथ हम धरना स्थल पर है. कुछ के बच्चे घर में हैं, जो बार-बार पूछते हैं कि मां कब घर आ रहे हो. दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए हैं. अब तो हम धरना स्थल से नियुक्ति पत्र लेकर जाएंगे या फिर यही धरना देकर प्राण त्याग देंगे.

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