तालिबान के हाथ लगे हवाई जहाज गिराने वाले 100 से अधिक एयर डिफेंस हथियार, टेंशन में दुनिया

रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने चिंता जताते हुए कहा कि पहला और मुख्य खतरा यह है कि तालिबान को भारी मात्रा में हथियार मिले हैं। इनकी संख्या बहुत ज्यागा है। शोइगु ने कहा कि इसमें सैकड़ों बख्तरबंद वाहन, हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

काबुल
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद आतंकियों के हाथ कई घातक हथियार लगे हैं। इनमें 100 से अधिक मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) भी शामिल हैं। ये हथियार आसानी से किसी यात्री हवाई जहाज या फिर हेलिकॉप्टर को मार गिरा सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि इन हथियारों को तालिबानी लड़ाके अपने कंधों पर उठाए कहीं से भी फायर कर सकते हैं।

रूस बोला- कोई कंट्रोल नहीं कर सकता
रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने चिंता जताते हुए कहा कि पहला और मुख्य खतरा यह है कि तालिबान को भारी मात्रा में हथियार मिले हैं। इनकी संख्या बहुत ज्यादा है। शोइगु ने कहा कि इसमें सैकड़ों बख्तरबंद वाहन, हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं आपको बताता हूं कि इसमें अकेले सौ से अधिक MANPADS शामिल हैं। इसे कोई भी कंट्रोल नहीं कर सकता है।

तालिबान के पास बिलियन डॉलर के अमेरिकी हथियार
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद करीब 28 बिलियन डॉलर के हथियारों को जब्त किया है। ये हथियार अमेरिका ने 2002 और 2017 के बीच अफगान बलों को दिया था। एक अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि जो हथियार नष्ट नहीं हुए हैं वे अब तालिबान के कब्जे में हैं।

सोवियत सेना का काल बने थे ऐसे ही मैनपैड्स
1980 के दशक में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, तब ऐसे ही मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें खूब परेशान किया था। सोवियत सेना के पास तब एक से बढ़कर एक अटैक हेलिकॉप्टर थे। इनके जरिए सोवियत सेना अफगान मुजाहिदीनों पर हमले किया करती थी। इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने पाकिस्तान की मदद से कई मुजाहिदीनों को ऐसे ही मैनपैड्स दिए थे। इसी से इन मुजाहिदीनों ने सोवियत सेना के कई हेलिकॉप्टरों को मार गिराया था।

क्या होते हैं MANPADS
मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम दरअसल कंधे पर उठाकर फायर करने वाला एक सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम होता है। यह हथियार कम ऊंचाई पर उड़ने वाले एयरक्राफ्ट, अमूमन हेलिकॉप्टरों को आसानी से निशाना बना सकता है। 1950 के दशक से अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत कई देशों की सेना इस हथियार का इस्तेमाल कर रही है।

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